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श्री कृष्ण के जन्म के सम्बन्ध में

श्री कृष्ण  के जन्म के सम्बन्ध में भगवान कृष्ण जन्म लगभग पाँच हजार वर्ष  पूर्व भादों के महिने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन परमात्मा भगवान विष्णु  माता देवकी के गर्भ से कंस के कारागार मथुरा में लिया था। तब से वह बन्दीगृह कृष्ण भगवान का मन्दिर बन गया । जन्म से पूर्व उन्होनें वसुदेव व देवकी जी को अपने उस अद्भुत रूप के दर्शन कराये जो अत्यन्त सुखदायक व कल्याणमयी था। कमलों के समान उनके नेत्र तथा शरीर नीले रगं का था। चारों भुजाओं में संख, चक्र आदि वराजमान थे। इस मंगल उत्सव को देखकर वसुदेव व देवकी जी अपने समस्त दुखों को भूलकर भगवान की भक्ति में मग्न हो गये ।तब भगवान विष्णु जी ने कहां की आप ‘मुझे अपने पुत्र की भांति समझें’ जिससे मेरी लिला सुचारू रूप से चल सके और आप मुझे यहाँ से लेजाकर गोकुल छोड़ दें तथा वहां यशोद के गर्भ से मेरी जो योगमाया कन्या रूप् में प्रकट हुई है, उसे यहां लाकर कंस को सौंप दें। सर्दी बुखार की सबसे आसान दवा जों आपके घर पर उपलब्ध हैं स्वस्थ रहने के नियम,   गर्भ धारण हेतु सरल उपयोग

श्री कृष्ण नगरी मथुरा के सम्बन्ध में

श्री कृष्ण नगरी मथुरा के सम्बन्ध में उत्तर-प्रदेश  (भारत) में स्थित मथुरा को श्रीकृष्ण भगवान की नगरी माना जाता है, यहाँ भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। महान ग्रन्थ गीता के अन्दर भी इसका उल्लेख बड़चड़ कर किया गया है यहां गोपाल जी के अनेकों मंदिर उपस्थित हैं, लेकिन यह मन्दिर गजनी महमूद द्वारा सन 1017 ई0 में नष्ट  किया गया तथा यहाँ की सम्पत्ति को लूटकर ले जाया गया।